मेरी गलती
poems on loveतू जो मिला मुझेमैंने सोचा पूरा होगा मरा जहानलेकिन हुआ न जो मैंने था सोचा और ज़िन्दगी ने लिया मेरा इन्तेहाँ
मैंने ना की किसी की फ़िकर न की किसीकी परवा मुझे उसने ठुकराया और दिया मुझे दूसरा दर्जा
वक्त ने ली कुछ ऐसी करवट मैं न कर सकी तुमसे कुछ शिकायत न हुयी शिकवा मेरी दूर मैं करने लगी तुमसे बेशुमार नफरत ए खुदा दे मुझे बरकत न कर मुझसे इतनी नफरत ना चुरा मुझसे तू नज़र एक बार माफ़ कर दे मुझेन दोहराऊँगी मैं यह हरकत